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कबाड़ से जुगाड़: शिक्षण सामग्री निर्माण

Categories: Education
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About Course

क्या आप संसाधनों की कमी को अपनी कक्षा की रुकावट बनने देंगे?

क्या आप एक ऐसे शिक्षक, स्वयंसेवक या बदलाव लाने वाले व्यक्ति (Change-maker) हैं जो मानते हैं कि हर बच्चे को—चाहे वह गाँव में हो या शहर में—बेहतरीन शिक्षा पाने का पूरा अधिकार है?

अक्सर हम देखते हैं कि स्कूलों में विज्ञान की लैब्स नहीं होतीं, गणित की किट नहीं होतीं, और इस कारण बच्चों की पढ़ाई केवल रटने (Rote Learning) तक सीमित रह जाती है। हम सोचते हैं, “काश! हमारे पास बजट होता।”

लेकिन Includia Trust का मानना है कि शिक्षा संसाधनों की मोहताज नहीं होनी चाहिए। एक बेहतरीन क्लासरूम बनाने के लिए बड़े फंड की नहीं, बल्कि एक रचनात्मक नजरिए की जरूरत है।

यही सिखाने के लिए हम लाए हैं अपना विशेष ऑनलाइन कोर्स: “कबाड़ से जुगाड़” (Trash to Treasure)

इस कोर्स में आप क्या सीखेंगे? यह एक 5-भागों वाला व्यावहारिक (Practical) कोर्स है जो आपको सिखाएगा:

  1. सामाजिक विज्ञान: पुराने अखबारों से 3D पहाड़ और नदियां (Relief Maps), लोकतंत्र सिखाने के लिए बैलेट बॉक्स, और इतिहास समझने के लिए ‘खुदाई किट’।
  2. गणित: पुराने गत्तों और बीजों से ‘स्थानीय मान’ और ‘भिन्न’ (Fractions) के मॉडल बनाना।

  3. विज्ञान: प्लास्टिक की बेकार बोतलों और स्ट्रॉ से हवा, पानी और शरीर के अंगों के वर्किंग मॉडल तैयार करना।

  4. भाषा: पुराने मोजों और कपड़ों से कठपुतलियाँ बनाकर बच्चों को कहानियाँ सुनाना।

  5. समावेश (Inclusion): दिव्यांग बच्चों के लिए इन मॉडल्स को कैसे अनुकूलित करें।

आपको यह कोर्स क्यों करना चाहिए?

  • आत्मनिर्भर बनें: अब आपको सरकार या संस्था से किट आने का इंतज़ार नहीं करना होगा। आप अपनी लैब खुद बनाएंगे।

  • शून्य लागत: हम उन चीजों का उपयोग करेंगे जो अक्सर डस्टबिन में जाती हैं।

  • प्रमाणपत्र: कोर्स पूरा करने पर Includia Trust की ओर से “Creative Educator” का सर्टिफिकेट प्राप्त करें।

यह कोर्स पूरी तरह से हिंदी में है और इसकी भाषा बहुत सरल है।

आइए, कूड़े को खजाने में बदलें और अपनी क्लासरूम में जादू बिखेरें। अभी एनरोल करें और शिक्षा में बदलाव की शुरुआत खुद से करें!

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Course Content

यूनिट 1: नींव और नजरिया (Foundation & Mindset)
इस पहली इकाई का उद्देश्य शिक्षक की मानसिकता को बदलना है। हम सीखेंगे कि कैसे अपने आस-पास बिखरे कूड़े को संसाधन की नजर से देखा जाए और डिजिटल इंटरनेट का उपयोग करके नए आइडियाज ढूंढे जाएं।

  • पाठ 1.1: शिक्षण सामग्री (TLM) का महत्व
  • Quiz
  • पाठ 1.2: संसाधन मानचित्रण (Resource Mapping)
  • चिंतन और कार्य (Reflection & Task for You)
  • पाठ 1.3: टूल-किट की तैयारी
  • Assignment: स्टार्च की शक्ति और हल्दी का जादूकुल अंक: 50 समय: 1 घंटा (सूखने का समय अलग) उद्देश्य:तापमान का स्टार्च (मैदा/आटा) पर प्रभाव समझना (Gelatinization)। प्राकृतिक रंग (हल्दी) का रासायनिक व्यवहार (pH Indicator) देखना।बनाई गई सामग्री की मजबूती (Durability) का परीक्षण करना। 🧪भाग 1: “कच्चा बनाम पक्का” – गोंद का विज्ञान (The Glue Experiment)हम अक्सर सोचते हैं कि आटा और पानी मिलाने से पेस्ट बन जाता है, तो उसे ‘पकाने’ की क्या जरूरत है? आइए इसे विज्ञान से सिद्ध करें। आवश्यक सामग्री:2 कटोरी, 2 चम्मच।मैदा या आटा।कागज की 4 पट्टियाँ (Strips)।एक भारी किताब या ईंट। चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Step-by-Step): सैंपल A (कच्चा पेस्ट): एक कटोरी में 1 चम्मच आटा और थोड़ा पानी मिलाएं। इसे पकाएं नहीं। बस घोल लें। सैंपल B (पक्का पेस्ट/लई): दूसरी कटोरी में 1 चम्मच आटा और पानी मिलाएं। इसे धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक यह पारदर्शी (Translucent) और चिपचिपा न हो जाए। (जैसा पाठ 1.3 में सीखा)। चिपकाना:कागज की दो पट्टियाँ लें। उनके बीच में ‘सैंपल A’ लगाएं और चिपका दें। उस पर ‘A’ लिख दें।कागज की अन्य दो पट्टियाँ लें। उनके बीच में ‘सैंपल B’ लगाएं और चिपका दें। उस पर ‘B’ लिख दें। सूखाना: दोनों को धूप में 1 घंटे के लिए सूखने दें। निरीक्षण और परीक्षण (Observation & Testing):सूखने के बाद, दोनों पट्टियों को अलग करने की कोशिश करें (खींचें)। प्रश्न 1: कौन सी पट्टी आसानी से उखड़ गई? (A या B) प्रश्न 2: कौन सी पट्टी इतनी मजबूती से चिपकी कि कागज फट गया लेकिन जोड़ नहीं खुला? वैज्ञानिक कारण (The Science Behind It):जब हम आटे (Starch) को पानी के साथ गर्म करते हैं, तो स्टार्च के अणु (Molecules) पानी सोखकर फूल जाते हैं और फट जाते हैं। इसे ‘Gelatinization’ कहते हैं। यही प्रक्रिया लई को एक मजबूत गोंद बनाती है। कच्चा आटा केवल सूखकर पाउडर बन जाता है, चिपकता नहीं है। 🎨 भाग 2: हल्दी का रंग बदलें – “जादुई पेंट” (The Magic Paint Experiment)हल्दी केवल पीला रंग नहीं है, यह विज्ञान की भाषा में एक “प्राकृतिक संकेतक” (Natural Indicator) है। आइए इसका जादू देखें।आवश्यक सामग्री:आपकी बनाई हुई ‘लई’ (Paste)।हल्दी पाउडर।कपड़े धोने वाला साबुन (Detergent) या चूना (Lime)।सफेद कागज। चरण-दर-चरण प्रक्रिया (Step-by-Step): पीला पेंट बनाना: थोड़ी सी ‘लई’ में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं। यह आपका पीला पेंट है। लिखना: इस पीले पेंट से कागज पर “INCLUDIA” या अपना नाम लिखें। जादू (The Magic Trick):थोड़ा सा डिटर्जेंट (सर्फ़) या चूना पानी में घोलें।अब एक रुई का फाहा (Cotton bud) या अपनी उंगली इस डिटर्जेंट के पानी में डुबोएं।इसे अपने लिखे हुए पीले नाम के ऊपर फेरें। निरीक्षण (Observation): प्रश्न 3: डिटर्जेंट लगते ही पीले रंग का क्या हुआ? क्या वह लाल/भूरा (Red/Brown) हो गया? वैज्ञानिक कारण (The Science Behind It):हल्दी (Turmeric) में ‘Curcumin’ होता है। यह एसिड और बेस (Acid-Base) को पहचानता है। साबुन या चूना ‘क्षारीय’ (Basic) होता है। जैसे ही हल्दी बेस (Base) के संपर्क में आती है, वह अपना रंग बदलकर गहरा लाल कर लेती है। (यही कारण है कि हल्दी के दाग पर साबुन लगाने से वह लाल हो जाता है!) 📋 असाइनमेंट सबमिशन शीट (Submission Sheet)इस असाइनमेंट को पूरा करने के लिए अपनी नोटबुक में यह टेबल बनाएं और फोटो खींचकर अपलोड करें। प्रयोगमेरा निरीक्षण (Observation)मैंने क्या सीखा? (Conclusion)गोंद की मजबूती(यहाँ लिखें: A मजबूत था या B?)(यहाँ लिखें: पकाना क्यों जरुरी है?) हल्दी का जादूसाबुन लगाने पर रंग ______ हो गया। हल्दी एक ______ इंडिकेटर है। बोनस टास्क (रचनात्मकता):अपनी बनाई हुई ‘लई’ और ‘हल्दी-पेंट’ का उपयोग करके एक छोटा सा ग्रीटिंग कार्ड बनाएं और उस पर लाल रंग (साबुन का उपयोग करके) से फूल बनाएं।

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